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Rajkumar Roat ने किया केंद्र सरकार पर कटाक्ष, आदिवासी क्षेत्र में हो पैसा कानून का पालन

Rajkumar Roat News : राजस्थान में तीन ऐसे नेता हैं जिन्होंने ना केवल राजस्थान गर्वमेंट बल्कि केंद्र सरकार के नाक में दम करके रख दिया है। एक तरफ हनुमान बेनीवाल सब पर भारी पड़ रहे हैं तो वहीं BAP के सांसद राजकुमार रोत भी लोकसभा में केंद्र सरकार की धज्जियां उड़ाने में लगे हैं, आइए जानते हैं कैसे राजकुमार रोत ने पीएम मोदी के नाक में दम कर दिया है?

राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) ने लोकसभा में मोदी सरकार की धज्जियां उधेड़ते हुए जवाब मांगा है। रोत ने कहा कि हम संविधान दिवस की वर्षगांठ मना लेते हैं। बिरसा मुंडा जयंति मना लेते हैं, लेकिन संविधान के मौजूद अंदर आदिवासियों को लेकर जो प्रावधान है उसे धरातल पर नहीं लाते। मैं मोदी सरकार को याद दिलाना चाहता हूं संविधान में निहित पांचवीं सूची को अभी तक लागू क्यों नहीं किया। संविधान की पांचवी सूच्री को धरातल पर ना लाना ये दर्शाता कि आदिवासियों के प्रति सरकार की मानसिकता कैसी है।

मैं मोदी सरकार को याद दिलाना चाहता हूं कि भले ही संविधान की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। लेकिन संविधान के अंदर आदिवासियों के सरक्षण और उनके हितों के लिए पांचवीं सूची का प्रावधान किया गया है, लेकिन धरातल पर अब तक क्यों नहीं लाया गया।

पांचवीं और छठीं अनुसूची में प्रावधान ये किया गया है कि बिना किसी ग्राम पंचायत से प्रमिशन लिए जमीन कंपनियों को अलॉट नहीं की जा सकती। लेकिन सरकारें एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने के लिए हजारों-हजारों आदिवासियों को विस्थापित कर जमीने अलॉट कर रही हैं। यह कहां का न्याय है?

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बता दें कि 1956 में पैसा कानून लाया गया, पैसा कानून में यह प्रावधान है कि बिना किसी पंचायत से प्रमिशन लिए डायरेक्ट किसी कंपनी को जमीन अलॉट नहीं कर सकते। लेकिन देश में पांचवीं और छठवीं सूची में शामिल जितने भी क्षेत्र हैं उसमें पैसा कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उद्योगपतियों को खूब जमीन दी जा रही है, सरकार को कोई मतलब नहीं कि चाहे आदिवासी कहां भटकेंगे। बस नीचे एक लाइन लिख जाती है कि राष्ट्रहित के लिए जमीन ली जाती है। हजारों आदिवासियों को विस्थापित कर किसी एक उद्योगपति को लाभ पहुंचाकर कौनसा राष्ट्रहित चाह रहे हैं हम लोग। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं, इस समय जो प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा काननू की धज्जियां उड़ाकर आदिवासियों के हकों को छीना जा रहा है, ये कहां का न्याय है।

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Mukesh Kumar

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