Ramgarh Crater Tourism: राजस्थान के बारां जिले के रामगढ़ में 60 करोड़ साल पहले उल्का पिंड गिरने के साक्ष्य आज भी मौजूद है और अब ये स्थान देश दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। केंद्र और राज्य सरकार रामगढ़ क्रेटर को डवलप करने के लिए हमेशा से प्रयासरत रही है। लेकिन अब इसको लेकर बड़ा ऐलान हुआ है और भारत के तीसरे उल्कापिंड प्रभाव क्रेटर रामगढ़ क्रेटर (बारॉं) को आधिकारिक तौर पर देश के पहले अधिसूचित भू-विरासत स्थल के रूप में नामित किया गया है। यह राजस्थान के लिए अत्यंत हर्ष व गर्व का विषय है।
यह भी पढ़ें: Rajasthan Lok Sabha Election Date 2024: राजस्थान में पहले चरण में 19 अप्रैल, दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान होगा

जियो हैरिटेज पर्यटन स्थल
देश के तीसरे और राजस्थान के पहले क्रेटर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से बहुत ज्यादा फायदा होगा। (Ramgarh Crater Tourism) इस क्षेत्र को जियो हैरिटेज पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने का फैसला बहुत ही अच्छा है। इसके लिए यहां 57 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य होंगे।पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भू विज्ञान, पुरातत्व और इतिहास का सामंजस्य है।
रामगढ़ क्रेटर का इतिहास
1869 में बारां जिले के मांगरोल तहसील से कुछ दूर क्रेटर की खोज की गई। यह क्रेटर 600 मिलियन वर्ष पूर्व अंतरिक्ष से किसी उल्का गिरने के प्रहार से बना था। प्राकृतिक भौगोलिक विरासत रामगढ़ क्रेटर को अंतरराष्ट्रीय संगठन, अर्थ इम्पैक्ट डेटाबेस सोसाइटी ऑफ कनाडा की ओर से वर्ष 2020 में संवैधानिक मान्यता दी गई है। उल्का पिंड गिरने के प्रमाण वैज्ञानिक रुप से स्थापित होते हैं क्योंकि उल्का पिंड के प्रहार से उत्पन्न उर्जा से रेत पिघलकर शीशा बन जाती है।

रिजर्व एरिया घोषित
पर्यटन विभाग ने रामगढ़ क्षेत्र को रिजर्व एरिया घोषित किया है और भू-विज्ञान पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम शुरू हो रहा है। रामगढ़ क्रेटर देश में एक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा क्योंकि यह स्थल भूविज्ञान, पुरातत्व और इतिहास के प्रतीक के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है।