Resident Doctors Strike: राज्य के रेजिडेंट डॉक्टर कल से एक बार फिर हड़ताल पर हैं। बीते 10 दिनों से जारी हड़ताल अब और बढ़ने जा रही है। ऐसे में एसएमएस अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई हैं। वहीं कल से इमरजेंसी सेवाएं बंद करने की रेजिडेंट चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में दूर दराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। वे इलाज के लिए कहां जाएंगे। सरकार और रेजिडेंट डॉक्टरों की लड़ाई में निजी अस्पताल वालों की चांदी होगी। जिसका कारण होगा एसएमएस सहित राजस्थान के कई जिलों के अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार। ऐसे में सारी जिम्मेदारी सीनियर डॉक्टरों पर होगी।
जयपुर में रेजिडेंट डॉक्टर्स 45 दिनों में अपनी मांगे न माने जाने के बाद सरकार के सामने आ गए हैं। अल्टीमेटम के बाद 18 अक्टूबर से इमरजेंसी सेवाएं न देने की चेतावनी दी गई है। जिसमें जयपुर एसएमएस हॉस्पिटल, आरयूएचएस और झालावाड़ हॉस्पिटल शामिल हैं। वहीं कोटा में ये हड़ताल शुरू हो चुकी है। ऐसा होने पर मरीजों और आमजन की जिम्मेदारी लेने वाला कौन होगा। ये देखने वाली बात होगी। वहीं दूसरी ओर सरकार रेजिडेंट्स पर सख्ती करने का मन बना चुकी है।
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जेएलएन मार्ग पर जुलूस निकालने के मामले में बीते दिनों एसएमएस थाना पुलिस की ओर से एक नोटिस भी जारी किया गया है। जिसका रेजिडेंट डॉक्टर्स की ओर से जवाब न मिलने पर पुलिस प्रशासन एक्शन की तैयारी में लगा है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की ओर से मामले में कहा गया है कि सरकार टैक्स पेयर्स का पैसा खर्च कर रही है। ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टर्स कुछ महीनों में नई डिमांड देते हैं। जो गलत है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार रेजिडेंट्स से जो बॉन्ड भरवाती है उस पर शर्तों के तहत कार्रवाई करने का मन बना रही है।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिसिंपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने प्रशासन से सर्विस डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सीनियर डॉक्टर्स को राउंड द क्लॉक ड्यूटी चार्ट बनाने के निर्देश भी दे दिए हैं। जिससे त्योहारी और मौसमी बीमारियों के सीजन में मरीजों को इलाज के लिए परेशानी न हो।
स्टूडेंट्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और हर साल निश्चित दर से वृद्धि
पीजी या सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की योग्यता के आधार पर नौकरी, विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) की सीधी भर्ती
हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की स्थिति में सुधार
वर्तमान अनिवार्य बॉन्ड नीति में बदलाव
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