RSS Malviya Bhag Ekatrikaran
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जयपुर प्रांत के मालवीय भाग (RSS Malviya Bhag Ekatrikaran) का आज महेश नगर स्थित परशुराम पार्क में एकत्रीकरण हुआ। इस एकत्रीकरण में मालवीय भाग के नगरों नें भाग लिया। इस एकत्रीकरण के दौरान कई सारे कार्यक्रम नगरों द्वारा किए गए।
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डॉक्टर मेजर योगेश शिशु रोग विशेषज्ञ इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि रहे। मेजर योगेश ने अपने उद्बोधन में अच्छे समाज से अच्छे देश की रचना की बात कही। वहीं, काव्य गीत के पश्चात दिनेश मणिरत्नम, जयपुर प्रांत बौद्धिक प्रमुख ने अपना बौद्धिक दिया। उन्होंने बताया कि देश कैसे निरंतर प्रगति के पथ पर चला रहे। भारत में अनेकों आक्रमण के बाद आज भी मृत्युंजय भारत उसी पथ पर है जिस पथ के लिए भारत जाना जाता था। स्वामी विवेकानंद जी के कहे वचन स्वयं पर विश्वास भले कितने भी बाधाय हो इस सूत्र को धारण करके आगे बढ़ने का प्रोत्साहन हमें संघ से सीखने को मिलता है।
मणिरत्नम ने अपने उद्बोधन में सूर्य नमस्कार से भगवा ध्वज के समक्ष अपने शरीर की साधना और अपनी चेतना को जागृत कर अपने देश और भूमि को समर्पण की बात की। उन्होंने बताया ’कैसे समाजवाद से समयवाद आया फिर लोकतंत्र आया लेकिन भारत एकदम अटल है जो कि वर्षों के अनुसंधान के बाद मिला है। स्वामी विवेकानंद के शब्द केवल शास्त्रों मे सिमट कर नहीं रह जाएं यह काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। लोगों में राष्ट्रीय चेतना का भाव जगाने का काम भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। तुलनात्मक अध्याय में भी उस कलंक को, जो कि बाबर ने राम जन्मभूमि को दिया, कम से कम नुकसान में हटाने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ही करवाया है।
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संघ सिर्फ कहता नहीं करके दिखाता है। स्वयंसेवकों के घर जला दिए गए जेल में डाल दिया गया पर स्वयं सेवक संघ सभी वेदनाओं से उभर कर आया और आज हर व्यक्ति स्वयं सेवक संघ को जानता है। हम सभी आंधी तूफान को पार करके आगे बढ़ने वाले स्वयंसेवक हैं यह किसी का विरोध नहीं बल्कि भारत माता के उद्धार का निश्चय है। मोक्ष प्राप्त करने के पहले भारत माता का समुत्कर्ष जरूरी है और यही संघ का मंत्र है। उद्बोधन खत्म करने के पहले दिनेश जी दो पंक्तियां कही ‘क्या खूब थे वह लोग हमें अपनी पहचान बता गए स्वयं को लुटा दिया और हिंदुस्तान बना गए।’
गणवेश में कुल स्वयंसेवक – 570
शारीरिक में भाग लेने वाले स्वयंसेवक- 190
समाज बंधु – 190
मातृ शक्ति – 30
कुल संख्या – 790
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