धर्म

डिग्गी कल्याणजी मंदिर में चढ़ता है चने का प्रसाद, आप भी जान लीजिए ये पौराणिक कथा

जयपुर। Diggi Kalyan Ji Yatra 2024 : इसबार डिग्गी कल्याणजी यात्रा 11 अगस्त से शुरू हो रही है। इस लक्खी यात्रा (Lakki Mela Yatra) में इस बार लाखों भक्तों के आने की संभावना जिसको लेकर प्रसाशन की तरफ से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राजस्थान के टोंक जिले में स्थित डिग्गी कल्याणजी मंदिर (Diggi Kalyan Ji Temple) राजधानी जयपुर से 75 किलोमीटर और टोंक से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर कई मान्यताओं के जुड़ा होने की वजह से विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में अपनी पहचान रखता है। डिग्गी कल्याणजी यात्रा में जयपुर और मध्यप्रदेश से पद यात्राएं आती हैं जिनमें हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

5600 साल पहले बना था डिग्गी कल्याणजी मंदिर

कहा जाता है कि डिग्गी कल्याणजी मंदिर (Diggi Kalyan Ji History) का निर्माण 5600 साल पहले डिग्गी के राजा डिग्व ने कराया था। उसके बाद संवत् 1584 यानि वर्ष 1527 में मंदिर का पुर्ननिर्माण मेवाड़ के तत्कालीन राणा संग्राम सिंह ने कराया था। मंदिर की स्थापना से पहले की कई रोचक कथाएं भी। यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण तिवाड़ी ब्राह्मणों ने करवाया। यहां पर साल श्रावण मास में लक्खी मेले का आयोजन होता है। इस मेले के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक दिवसीय स्थानीय अवकाश (Diggi Kalyan Ji Yatra Chutti) भी घोषित किया जाता है। झलझूलनी एकादशी के अलावा वैशाख पूर्णिमा और श्रावण माह की अमावस्या को भी डिग्गी में मेले का आयोजन होता है।

डिग्गी कल्याणजी का प्रसाद भुने हुए चने

डिग्गी कल्याणजी का मुख्य प्रसाद (Diggi Kalyan Ji Prasad) भुने हुए चने हैं जो भक्तों द्वारा यहां चढ़ाएं जाते हैं। इस मंदिर में हरिहर, शिव पार्वती, विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी विद्यमान हैं जो विभिन्न मतावलंबियों की आस्था का प्रतीक है।

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डिग्गी कल्याणजी की कथा

यह भी कहा जाता है कि यह मंदिर मंदिर दसवीं शताब्दी का बना हुआ है जिसकी बाद में पुन:प्रतिष्ठा की गई। इस विषय में एक दंतकथा (Diggi Kalyan Ji Katha) भी प्रचलित है कि सप्तऋषि इस स्थान पर तपस्या किया करते थे। इन्द्र देव ने तपस्या भंग करने की दृष्टि से उर्वशी को वहां भेजा। ऋषियों ने इस पर नाराज होकर उनको श्राप दे दिया। जिस कारण वो दिवा घोड़ी के रूप में रहने लगी। लेकिन, उस क्षेत्र का राजा उसें अपने साथ ले गया। उर्वशी ने भी राजा को श्राप दे दिया जिससे वह कोढ़ी हो गया। कोढ़ मिटाने के लिए वह द्वारिका गया जहां सागर तट पर उसें कल्याणजी की प्रतिमा मिली जिसकोवो कल्याण कह कर वह डिग्गी ले आए और मंदिर बनाकर प्रतिष्ठित कर दिया।

11 अगस्त को शुरू होगी डिग्गी कल्याणजी यात्रा

डिग्गी कल्याणजी यात्रा 2024 इस बार 15 अगस्त को शुरू होगी। जयपुर से डिग्गी कल्याणजी पदयात्रा (Diggi Kalyan Ji Padyatra) ताड़केश्वर जी के मंदिर से शुरू होकर सांगानेर मदरामपुरा, रेनवाल फागी, निमेड़ा, चौसला होते हुए श्री जी महाराज डिग्गी 15 अगस्त को पहुंचेगी। जयपुर के ताड़केश्वर मंदिर से शुरू होने वाली इस विशाल लक्खी पदयात्रा में लाखों की संख्या यात्री शामिल होने वाले हैं। ये सभी भक्त कल्याणजी महाराज के दर्शन करके अपने जीवन और राज्य में खुशहाली की प्राथना करेंगे।

Anil Jangid

Anil Jangid डिजिटल कंटेट क्रिएटर के तौर पर 13 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। 10 साल से ज्यादा समय डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर राजस्थान पत्रिका, 3 साल से ज्यादा cardekho.com में दे चुके हैं। अब Morningnewsindia.com और Morningnewsindia.in के लिए डिजिटल विभाग संभाल रहे हैं।

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