जयपुर। सावन का महीना बारिश की वजह से हरियाली से भरपूर होता है जिस कारण कई लोग घूमने और मंदिर में दर्शन करने के लिए जाते हैं। उत्तर भारत में इस महीने में जिन जगहों पर लोग अधिक जाते हैं उनमें मथुरा वृंदावन (Mathura Vrindavan Yatra) भी शामिल है। सावन के महीने में यहां पर कृष्ण और शिव भक्तों की यहां भीड़ लगती है। वृंदावन में सावन में भक्त शिव की पूजा करने, जलाभिषेक करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए खूब जाते हैं। लेकिन अगर आप भी मथुरा वृंदावन जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जरा सावधान होने की जरूरत है क्योंकि यहां पर कई जगह ऐसी हैं जो इन दिनों खतरे वाली हो जाती है। ऐसे में आपको बता दें कि रहे हैं मथुरा वृंदावन की उन जगहों के बारे में जहां पर सावन के महीने में मनाही होती है, क्योंकि यहां जाने पर खतरा हो सकता है।
भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए मथुरा वृंदावन में लोगों को कुछ जगहों जाने पर रोक लगाई गई है। क्योंकि बारिश के मौसम में यमुना का जलस्तर काफी बढ़ चुका है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से यमुना किनारे बने मंदिर और घाटों पर नहीं जाने के लिए कहा गया है। इसके बावजूद भी आपने प्रशासन की बात नहीं मानी तो बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।
मथुरा जाने वाले कंस टीला नहीं जाएं क्योंकि यमुना का जलस्तर 2 फीट तक बढ़ चुूका है। इस वजह से हादसा होने की संभावना बढ़ चुकी है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है की कंस टीला पर नहीं जाएं।
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मथुरा में स्थित इस घाट पर भी यमुना का जल स्तर बढ़ रहा है। इस वजह से यहां भी नहीं जाएं क्योंकि यहां पर यमुना में नाव की सवारी करना बड़ी मुसीबत बन सकती है।
यमुना नदी के किनारे बसे पवित्र घाटों में से एक चीर घाट भी है। यहां पर श्रीकृष्ण गोपियों के कपड़े चुराते थे। यहीं पर एक प्राचीन कदंब का पेड़ भी है जो भगवान कृष्ण के समय से आज भी मौजूद है। लोग मथुरा आते हैं तो इस घाट पर जरूर जाते हैं। लेकिन, इस बार यहां पर जाने से पहले सावधानी रखने के लिए कहा गया है।
यह वृंदावन का मुख्य घाट है जहां लोग जरूरत जाते हैं। कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने केशी का वध इसी जगह पर किया था। इस घाट पर हर शाम के समय महाआरती होती है। ऐसे में यदि आप इस आरती में शामिल होते हैं तो जरा सावधानी बरतें।
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