मल्टी स्टोरीज बिल्डिंग में रहने वाली मां परेशान है, मोबाइल की लत से।
ऐसा क्यों?
माना मां का काम डिजिटल से जुड़ा है, पर समस्या यह नहीं। समस्या तो मां का मुन्ना है। मां निकल जाती है सुबह ऑफिस में, पिता भी चले जाते हैं अपने ऑफिस। ऐसे में 16 वर्षीय अर्जुन जब स्कूल से दोपहर में घर लौटकर आता है। तब खाना खाकर क्या करें?
माता-पिता की मजबूरी है कि इमरजेंसी में बच्चे के पास मोबाइल होना चाहिए। ऐसे में वे अर्जुन को मोबाइल तो देते हैं। लेकिन उसमें सामान्य पैकेज डलवा कर। जिससे बच्चा इंटरनेट से ना जुड़े। तो क्या होता है?
अब मां की समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अब बच्चा स्कूल की छुट्टियां अधिक करने लगा। एक तो वह टेंथ बोर्ड में है। ऊपर से स्कूल की इतनी छुट्टियां? कुछ समय बाद मां को कारण पता चला।
जिस बिल्डिंग में वे रह रहे हैं। उसके आसपास से उनके एरिया में वाईफाई कनेक्शन मिल रहा है। इस पर माता-पिता को गुस्सा आया। उन्होंने ऊपर की बिल्डिंग पर जाकर एक सज्जन को कहा, कृपया अपने वाईफाई को ठीक करवाएं। मुफ्त का वाईफाई हमारे बच्चे पर नेगेटिव प्रभाव डाल रहा है।
ऐसा करके माता-पिता फिर निष्फिक्र हो गए। थोड़े दिन बाद ही फिर से बच्चे की वही लत शुरू हो गई। पता चला अब नीचे वाली बिल्डिंग से वाईफाई मिल रहा है। ऐसे में माता-पिता क्या करें?
सस्ता इंटरनेट डाटा समस्या बनकर उभर रहा है। जिससे ना केवल बच्चों की कोमल आंखें खराब हो रही है अभी तो उनकी पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ रहा है। ऊपर से कई बीमारियां और मनोविकृतियां बच्चों में बढ़ रही है।
दूसरी तरफ कुछ अभिभावक ऐसे भी हैं जो अपना काम निपटाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को उम्र से पहले ही मोबाइल दिला देते हैं या दे देते हैं। उन्हें नहीं पता इस स्मार्टफोन का उनके बच्चों की मेंटल हेल्थ पर कितना नेगेटिव इंपैक्ट होगा?
आगे चलकर इन बच्चों की आदत ऐसे ही पड़ जाती है। जिससे वे ना तो घर का काम ठीक से कर पाते हैं ना स्कूल का। इतना ही नहीं ऐसे बच्चे इंटरनेट पर बुलिंग, हैकिंग और इंफॉर्मेशन लीक मामले में भी चपेट में आते हैं।
ऐसे में ध्यान रखें। बच्चों को अपना समय दे, मोबाइल नहीं। मुफ्त के इंटरनेट डाटा से स्थिति बिल्कुल वैसे ही बनती है। जैसे मुफ्त के नशे से। ऐसा नशा पहले बहुत अच्छा लगता है। लेकिन फिर समस्याएं खड़ी करता है।
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