Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में बीते एक महीने से चल रही हिंसा ने उग्र रूप ले लिया है। प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया है। उन्हें देश में चल रहे छात्र आरक्षण आंदोलन में सख्ती बरतना महंगा पड़ गया। अंत में उन्हें ही 4 अगस्त को पीएम पद त्याग देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। फिलहाल शेख हसीना ने भारत में शरण ली हुई है और अब वह यहां से ब्रिटेन या फिनलैंड जैसे किसी देश में जाने की फिराक में है।
बांग्लादेश में फैली इस अराजकता के पीछे किसका हाथ है? आखिर एक छोटा सा मुद्दा इतना बड़ा कैसे बन गया? इस तरह के सवालों के जवाब हर किसी के मन में है। बीते एक महीने पहले से प्रकाशित हो रही मीडिया रिपोर्ट्स को खंगालने पर पता चलता है कि, बांग्लादेश में फैली यह हिंसा ढाका यूनिवर्सिटी के तीन छात्रों की वजह से हुई है। ये तीन छात्र है नाहिद इस्लाम, आसिफ महमूद और अबू बकर मजूमदार। ये तीनों ही आरक्षण के खिलाफ आंदोलन के अगुवा थे।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीनों छात्रों को 19 जुलाई को अगवा किया गया था। उनसे कड़ी पूछताछ के दौरान उनका उत्पीड़न भी हुआ। इसके बाद उन्हें 26 जुलाई को छोड़ दिया गया। बाहर आकर तीनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाया और करीब 10 दिन के अंदर ही तख्तापलट हो गया। पीएम शेख हसीना इस्तीफा देकर देश छोड़ चुकी हैं। देश की सत्ता अब सेना के हाथ में है। अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया में तीनों छात्र नेताओं की अहम भूमिका है।
ढाका यूनिवर्सिटी के तीनों छात्रों ने एक वीडियो जारी किया है। इसके माध्यम से उन्होंने एलान किया है कि अंतरिम सरकार के मुखिया नोबेल विजेता अर्थशास्त्री डॉ. युनूस होंगे। यह उल्लेखनीय है कि इन तीनों ही छात्र नेताओं की उम्र 25 साल के आसपास है।
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