Abu Dhabi Temple: पीएम मोदी यूएई के देश अबू धाबी में आज 14 फरवरी को भव्य हिंदू मंदिर का उद्घाटन करने वाले हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर (Abu Dhabi Temple) के बारे में हम आपको खास बाते बताने जा रहे हैं। मुस्लिम मस्जिदों की तरह ही इस भव्य मंदिर (Abu Dhabi Temple) में भी सात शिखर बनाए गए हैं। मुस्लिम देश में बना यह शानदार मंदिर अपनी अनूठी कारीगरी और हिंदू मुस्लिम तहजीब की साझी तस्वीर पेश करेगी। तो चलिए इस दिव्य मंदिर के बारे में जान लेते हैं।
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अबू धाबी में बन रहा ये मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से भी काफी बड़ा है। इस मंदिर (Abu Dhabi Temple) को भव्य बनाने के लिए मकराना के सफेद मार्बल को इस्तेमाल किया गया है। साथ ही राजस्थान के लाल बलुआ पत्थरों पर बेहद उम्दा नक्काशी की गई है। मंदिर के लिए प्रिंस ने जमीन दान में दी है। वही अबू धाबी मंदिर में 7 शिखर बनाए गए हैं। जैसे मस्जिदों में मीनारें होती हैं। ठीक वैसे ही ये 7 शिखर जिन पर अलग अलग देवताओं से जुड़ी कहानियों और प्रतीकों को दर्शाया गया हैं काफी हद तक मुस्लिम स्थापत्य कला से जुड़े हैं। हालांकि 7 अंक का एक और महत्व है। UAE 7 अमीरात यानी 7 रियासतों से मिलकर बना हुआ देश है। तभी तो भारत और UAE की संस्कृतियों का गंगा जमुनी संगम दिखाने के लिए मंदिर में 7 मीनारें बनाई गई हैं।
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यूएई में मंदिर (Abu Dhabi Temple) बनाने की पहली कोशिश 1997 में की गई थी, जब स्वामी नारायण संस्था के प्रमुख ने UAE में मंदिर बनाने की सोच विकसित की। इस दौरान काफी कोशिशें चलती रही, लेकिन इन कोशिशों को अंजाम तक पहुंचाने में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बड़ी भूमिका रही है। राम मंदिर के बाद से ही इस मंदिर को लेकर चर्चा बनी हुई थी।
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2021-22 के आंकड़े बताते हैं कि चीन और अमेरिका के बाद यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। 2022 में यूएई में रहने वाले भारतीयों ने 20 अरब डॉलर की कमाई भारत भेजी थी। 2019 में पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ज़ायेद’ से ये खाड़ी देश सम्मानित कर चुका है। साथ ही पीएम मोदी ने भी प्रोटोकॉल तोड़ कर 2017 के रिपब्लिड डे परेड में मोहम्मद बिन ज़ायद अल-नाह्यान को मुख्य अतिथि बनाया। तो भारत और अरब देशों के रिश्ते इस मंदिर के बनने के बाद और भी ज्यादा बेहतर होंगे।
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