चीन के बढ़ते कदमों से अब दुनिया ही नहीं अमेरिका भी अपनी नीतियों में बदलाव करने जा रहा है। पिछले कुछ समय में चीन अपनी सैन्य शक्ति में लगातार इजाफा कर रहा है। जिससे अन्य देशों के साथ वैश्विक शक्ति कहा जाने वाला अमेरिका भी उसे खतरा मानने लगा है। इस खतरे से बचने और अपनी जगह बनाए रखने के लिए अमेरिका ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जो भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि लम्बे समय से चीन की विस्तारवादी नीति के कारण भारत को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्यूनिटी की ताजा रिपोट्र्स को देखते हुए यह बदलाव किया जा रहा है।
चीन कर रहा आलोचना
अमेरिका की रिपोट्र्स का चीन की ओर से विरोध किया जा रहा है। चीन के अनुसार यह बयान दुनिया में चीन को बदनाम करने के लिए दिया जा रहा है। दूसरी ओर चीन के शीर्ष नेता शी जिनपिंग अपना तीसरा कार्यकाल शुरू करने जा रहे हैं। जिनके नेतृत्व में कम्यूनिस्ट पार्टी सीपीसी ताइवान पर एकीकरण का दबाव डाल रही है। जिससे अमेरिका के साथ उसके फासले और बढ़ जाएं।
विस्तारवादी नीति है जड़
वार्षिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की विस्तारवादी नीति जारी रखने की तैयारी है। इसके लिए वो अमेरिका के सामने मजबूत रहने के लिए रूस के साथ अपने सबंध कायम रखेगा। दूसरी ओर ताइवान के एकीकरण पर भी दबाव डालेगा। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर ताइवान पर चीन कब्जा करने में कामयाब होता है तो वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव पड़ेगा। जिससे चीन के साथ समुद्री विवाद रखने वाले फिलीपींस, वियतनाम, जापान, ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान पर भी सीधा असर होगा।
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