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समलैंगिक रिश्ता रखने पर इन देशों में मिल सकती है सजा-ए-मौत, बाकी देशों में भी हालात ठीक नहीं

आज भले ही आधुनिकता की दौड़ में हम बहुत आगे बढ़ आए हों लेकिन कुछ चीजें अभी भी नहीं बदली हैं। फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स और लिव-इन-रिलेशनशिप जैसी चीजों के बीच भी  समलैंगिक विवाह को आज भी बुरी नजर से देखा जाता है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि दुनिया के करीब 60 से अधिक देशों में आज भी गे मैरीज या होमोसेक्सुएलिटी को अपराध माना गया है।

 

इन 64 में से करीब आधे देश तो अकेले अफ्रीका महाद्वीप में ही मौजूद है जहां LGBTQ रिलेशन्स को अपराध घोषित किया गया है। इसके बाद मिडिल ईस्ट का नंबर आता है, जहां लगभग हर देश में होमोसेक्सुएलिटी अपराध है। यदि आधुनिक देशों के बात करें तो अत्याधुनिक देश सिंगापुर में हाल ही दिसंबर 2022 में दो पुरुषों के बीच विवाह को बैन कर दिया गया है।

 

गे रिलेशनशिप पर मिलती है सजा-ए-मौत

 

यदि मिडिल ईस्ट देशों की बात की जाए तो सऊदी अरब, ईरान, यमन, ब्रुनेई, कतर, सीरिया, ईराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, अफगानिस्तान, सहित काफी देशों में गे रिलेशनशिप पर कैद से लेकर सिर कलम करने तक की सजा मिलती है। पाकिस्तान, जाम्बिया, उगांडा, सूडान, तंजानिया, सिएरा लिओन, गुयाना, गांबिया और बांग्लादेश में समलैंगिक विवाह के लिए उम्रकैद की सजा दी जाती है।

 

इनके अलावा भी लगभग 71 देशों में गे मैरिज या गे रिलेशनशिप को अपराध माना गया है। इन देशों में ऐसे संबंध पाए जाने पर इन देशों में छह महीने से लेकर दस वर्षों तक की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही कुछ जगहों पर गे कपल्स को मानसिक रोगी मानते हुए उनके लिए कन्वर्जन थैरेपी भी दी जाती है जिसमें इलाज के नाम पर घोर पीड़ा का सामना करना पड़ता है। यही नहीं, लड़कियों को तो गैंगरेप तक का शिकार होना पड़ता है।

 

यूरोप की बात करें तो रूस जैसे देश समलैंगिक संबंधों पर आर्थिक जुर्माना लगाए जाने की भी सजा देते हैं। कई मामलों में ऐसे लोगों को जेल भी भेजा जा सकता है। कई बार उन्हें ऐसे देशों में भी तथाकथित कन्वर्जन थैरेपी झेलनी पड़ सकती है। वे बच्चे गोद नहीं ले सकते हैं। 

 

भारत में क्या है हाल

 

हिंदुस्तान में वर्ष 2018 में गे रिलेशनशिप को अपराधमुक्त कर दिया गया था। फिर भी इस तरह के विवाहों को मान्यता नहीं दी गई है। आज सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले में भी इस पर मुहर लगा दी गई है। समाज की बात करें तो आज भी अधिकांश भारतीय वैचारिक और मानसिक रूप से ऐसे रिश्तों को मान्यता देने के लिए तैयार नहीं हैं।

 

झेलना पड़ता है सामाजिक और मानसिक बहिष्कार

 

अमरीका और यूरोप के कुछ देशों को छोड़ दिया जाए तो आज भी बहुत से देशों में इस तरह के संबंध रखने वालों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है। एक बार पहचान सार्वजनिक हो जाए तो उन्हें नौकरी और किराए का मकान तक मिलना मुश्किल हो जाता है। समाज में उन्हें घृणित नजरों से देखा जाता है। 

 

उनके साथ लोग किसी भी तरह का संबंध नहीं रखना चाहते हैं। जानबूझ कर उनकी अवहेलना की जाती है। ऐसे लोगों को सार्वजनिक तौर पर घृणा का निशाना बनाया जाता है और अपमानित किया जाता है। 

Anil Jangid

Anil Jangid डिजिटल कंटेट क्रिएटर के तौर पर 13 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। 10 साल से ज्यादा समय डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर राजस्थान पत्रिका, 3 साल से ज्यादा cardekho.com में दे चुके हैं। अब Morningnewsindia.com और Morningnewsindia.in के लिए डिजिटल विभाग संभाल रहे हैं।

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