क्या आप जानते हैं?
दुनिया में हर सातवें इंसान में से एक इंसान आज मेंटल डिसऑर्डर का सामना कर रहा है। अवसाद आज महामारी का रूप ले रहा है।
स्वास्थ्य क्या है? इस पर डब्ल्यूएचओ ने गाइडलाइन जारी कर रखी है। इस गंभीर मुद्दे को आज हम दरकिनार कर रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर मुद्दा है। जिस पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है। आज ऐसा कोई आयु वर्ग नहीं बचा ,जो इस डिसऑर्डर से ना गुजर रहा हो। खासकर आज का युवा वर्ग इस अवसाद का अधिक शिकार हो रहा है।
फिर क्या है समाधान?
ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च में पता चला है कि साइकोथेरेपी से डेढ़ गुना ज्यादा तेजी से असर करता है फिजिकल एक्टिविटी करना। जो लोग एक्टिव रहते हैं। उनमें तनाव, अवसाद की कमी देखी गई। वही जो लोग पूरे दिन एक ही स्थान पर बैठे-बैठे निकाल देते हैं। कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते। वह इसके शिकार अधिक होते हैं।
शारीरिक व्यायाम और घर के कामकाज करने से तनाव, चिंता अवसाद जैसे हालात कम उपस्थित होते हैं। ऐसे में योग करना भी बहुत फायदेमंद है। माना जा रहा है कि 12 हफ्तों तक एक्सरसाइज की जाए तो इससे कम समय में ही मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है। एक्सरसाइज का सबसे अधिक प्रभाव पोस्टपार्टम डिप्रेशन, एचआईवी या किडनी के रोगियों को देखने को मिला। डिप्रेशन से जूझ रहे इन लोगों में एक्सरसाइज का पॉजिटिव इंपैक्ट हुआ। इसके अलावा अगर आप वाकिंग, एरोबिक्स, योगा करते हैं तो भी आपके डिप्रेशन, एंजाइटी अवसाद में कमी आ सकती है। ऐसा रिसर्च में दावा किया गया है।
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