अब सरकार एक ऐसा शख्त कानून लेकर आ रही है जो मुस्लिम महिलाओं पर भारी पड़ेगा। इस नए कानून के तहत मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनना ही होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें जेल और जुर्माना की सजा दी जाएगी। यह मामला ईरान का है जहां हिजाब को लेकर महसा अमिनी की मौत के बाद हुए देश व्यापी प्रदर्शनों का ईरान की कट्टरपंथी सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा है। यहां की सरकार अब हिजाब पर एक नया विधेयक लेकर आ रही है जिसमें अभूतपूर्व रूप से कठोर दंडात्मक उपाय किए जाएंगे। ईरान के अधिकारियों ने हिजाब पर अनुच्छेद- 70 का ड्राफ्ट तैयार किया है जिसमें में हिजाब नहीं पहनने पर महिलाओं को जेल की लंबी सजा और नियमों का उल्लंघन करने वाले मशहूर हस्तियों व कारोबारियों के लिए कठोर दंड की व्यवस्था की गई है। वहीं ड्रेस कोड का पालन न करने वाली महिलाओं की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज किया जाएगा।
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हिजाब मामले पर शख्त है सरकार
खबर है कि यह विधेयक ईरानी (Iran Hijab) संसद में अभी पास नहीं हुआ है। हालांकि, इसके जरिए ईरानियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दे दी गई है कि पिछले साल हुए भारी विरोध के बावजूद सरकार हिजाब पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी। यह विधेयक इस साल की शुरुआत में ईरानी न्यायपालिका ने ड्राफ्ट करके विचार के लिए सरकार के पास भेजा गया था। इसके बाद उस ड्राफ्ट को कानूनी- न्यायिक आयोग में भेजा गया। इस विधेयक को संसद के पटल पर पेश करने से पहले रविवार को गवर्नर्स बोर्ड में पेश किया जाएगा। इसके बाद अगले 2 महीने में ईरानी सांसद इस विधेयक को मंजूरी देने के लिए मतदान करेगी।
महसा अमीनी की मौत से मचा बवाल
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी (Iran Hijab Update) महिला अमिनी को ईरान की मोरल पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने हिजाब को ढंग से नहीं पहना था। इसके बाद पुलिस हिरासत में उनकी जबरदस्त पिटाई की गई, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद देशभर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों के गुस्से को देखते हुए मोरल पुलिस ने अपने कदम पीछे लिए और महिलाओं की पकड़ाधकड़ी बंद कर दी। अब पुलिस प्रवक्ता जनरल सईद मोंटाज़ेरोलमहदी ने कहा कि मोरल पुलिस पुलिस सार्वजनिक रूप से इस्लामी हेडस्कार्फ़ के बिना पकड़ी जाने वाली महिलाओं को चिह्नित करना और उन्हें हिरासत में लेने का काम फिर से शुरू करेगी।
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लंबे समय से विवाद का मुद्दा
ईरान में हिजाब (Iran Hijab Updates) लंबे समय से विवाद का मुद्दा रहा है। 1936 में नेता रेजा शाह के महिलाओं की मुक्ति के दौरान हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि उनके उत्तराधिकारी ने 1941 में प्रतिबंध हटा लिया। 1979 की इस्लामी क्रांति में आखिरी शाह को उखाड़ फेंकने के बाद ईरान में 1983 में हिजाब अनिवार्य कर दिया गया था।
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होगी इतनी सजा और जुर्माना
आपको बता दें कि ईरान पारंपरिक रूप से अपने इस्लामी दंड संहिता के अनुच्छेद 368 को हिजाब कानून मानता है, जिसमें कहा गया है कि ड्रेस कोड का उल्लंघन करने वालों को 10 दिन से लेकर दो महीने तक की जेल या 50,000 से 500,000 ईरानी रियाल के बीच जुर्माना हो सकता है। अब नए विधेयक में हिजाब (Iran Hijab Updates) का उल्लंघन करने पर 5 से 10 साल की जेल की सजा के साथ-साथ 360 मिलियन ईरानी रियाल (8,508 अमेरिकी डॉलर) तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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