जापान बहुत जल्द पैसिफिक ओशन को 132 करोड़ लीटर रेडियोएक्टिव पानी से गंदा करने जा रहा है। वह अपने खराब हुए न्यूक्लियर प्लांट का ट्रीटेड रेडियोएक्टिव वाॅटर उसमें छोड़ने की तैयारी कर रहा है। जिसके लिए उसे यू एन के न्यूक्लियर वाॅचडाॅग का अप्रूवल भी मिल गया है। वहीं समुद्र के किनारे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ कई देश इसका विरोध भी कर रहे हैं।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी चीफ मिले प्रधानमंत्री से
रेडियोएक्टिव पानी को समुद्र में छोड़े जाने को लेकर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी चीफ राफेल ग्रौसर ने जापान पहु ंचकर प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा से भी मीटिंग की। जिसमें सेफ्टी रिव्यू पर बातचीत की गई। जिसमें बताया गया कि रेडियोएक्टिव पानी छोड़ना यहां के सेफ्टी स्टैंडडर््स में सही है।
देश ही नहीं विदेश में हो रहा है विरोध
न्यूक्लियर प्लांट का ट्रीटेड रेडियोएक्टिव वाॅटर पैसिफिक ओशन में छोड़े जाने के निर्णय का हर ओर से विरोध भी हो रहा है। जापान के ही कोस्टल एरिया में रहने वाले लोग इसका भरपूर विरोध कर रहे हैं। यही नहीं चीन, साउथ कोरिया के साथ कई अन्य देश भी इसका विरोध कर रहे हैं।
फिशिंग इंडस्ट्री हो जाएगी बर्बाद
लोगों का कहना है कि ये पानी समुद्र में छोड़ा गया तो वहां के वातावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। जापान में फिशिंग कारोबार से जुड़े लोग इससे बहुत चिंतित हैं। उनका कहना है गंदा पानी समुद्र में मिलने से पानी के जानवरों के लिए तो खतरा है ही साथ में वहां से निकली मछली खाने वालों के लिए भी खतरा हो सकता है।
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