जयपुर। जापान की नजर अब भारतीय युवाओं पर पड़ चुकी है क्योंकि वहां की 20 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बूढ़ी हो चुकी है। इस वजह से वहां खेती-किसानी पर संकट आ गया है। इसी वजह से जापान के किसान अब भारत के कोने-कोने से स्किल्ड लेबर वहां लेकर जा रहे हैं। इसके लिए जापान ने भारत सरकार के साथ एक समझौता भी किया है। इस समझौते के तहत भारत सरकार एक कार्यक्रम चला रही है जिसमें जापान की जरूरतों के हिसाब युवाओं को जरूरी ट्रेनिंग दी जा रही है।
भारतीयों को जापान में मिल रही नौकरी
भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2022 तक भारत से 598 युवक जापान जा चुके थे। इन सभी ने NSDC यानि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की तरफ से संचालित टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत अलग-अलग गुर सीख रखे हैं।
इतनी मिलती है सैलरी
जापान की खेती-बाड़ी वाली कंपनियों में काम के घंटे, सैलरी आदि सब तय है। वहां 1.2 लाख येन (करीब 75 हजार रुपये) के आसपास मासिक सैलरी मिलती है। इतना ही नहीं बल्कि ओवरटाइम करने के मौके भी मिलते हैं।
जापान में बढ़ती बुजुर्गों तादात बनी कारण
जापान की बड़ी आबादी के उम्रदराज होने का असर जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन से लेकर वहां के शहरों के आकार और पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पड़ रहा है। जापान में अभी 20 प्रतिशत आबादी की उम्र 65 वर्ष से ज्यादा है। यह दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले बुजुर्गों की औसत आबादी से ज्यादा है।
बेहद पाबंदी है वक्त की
जापान में वक्त की बेहद पाबंदी है। वहां छोटी-छोटी बात की योजना बनती है और मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने के तरीके अपनाए जाते हैं। यहां लंच ब्रेक के बाद काम पर लौटने में एक मिनट की देरी पर ही कॉल आ जाती है। यहां अनुशासित होना बेहद जरूरी है।
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